सीतामढ़ी–जयनगर–सुरसंड रेललाइन का सर्वे फरवरी से, 17 साल का इंतज़ार होगा खत्म

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सीतामढ़ी/मधुबनी: उत्तर बिहार के रेल नेटवर्क विस्तार और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी सीतामढ़ी–जयनगर–सुरसंड नई रेललाइन परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। रेलवे प्रशासन ने आगामी फरवरी 2026 से सुरसंड क्षेत्र में फाइनल अलाइनमेंट सर्वे शुरू करने का निर्णय लिया है।

​188 किलोमीटर लंबी परियोजना को मिली नई जान

​यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना कुल 188 किलोमीटर लंबी है। गौरतलब है कि इसे सबसे पहले वर्ष 2008–09 में स्वीकृति दी गई थी, लेकिन तकनीकी पेच और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई थी।

​रेलवे सूत्रों के मुताबिक, अब इस प्रोजेक्ट के लिए निविदा (Tender) प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चयनित एजेंसी फरवरी से ज़मीन की स्थिति, सामाजिक प्रभाव और आर्थिक व्यवहार्यता का बारीकी से अध्ययन करेगी, जिसके आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी।

​उतार-चढ़ाव भरा रहा सफर: 2019 की रोक से 2025 की दोबारा मंजूरी तक

​इस परियोजना का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है:

  • 2008-09: रेल बजट में पहली बार मंजूरी मिली।
  • 2019: रेलवे बोर्ड ने अनिश्चित काल के लिए परियोजना पर रोक लगा दी, जिससे स्थानीय लोगों में भारी निराशा थी।
  • 29 सितंबर 2025: वर्षों के आंदोलन और मांग के बाद रेलवे बोर्ड ने परियोजना को पुनः हरी झंडी दी।
  • फरवरी 2026: फाइनल अलाइनमेंट सर्वे की शुरुआत होने जा रही है।

​ललित ग्राम–वीरपुर रेललाइन में भी आई तेजी

​उत्तर बिहार के लिए एक और खुशखबरी यह है कि ललित ग्राम से वीरपुर तक प्रस्तावित 22 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन पर भी काम तेज़ हो गया है। इस लाइन के लिए 9 सितंबर 2025 को ही अंतिम सर्वे की मंजूरी दी जा चुकी है। इन दोनों परियोजनाओं के जुड़ने से नेपाल सीमा से सटे भारतीय क्षेत्रों में परिवहन की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

​क्षेत्र के विकास पर क्या होगा असर?

​विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस रेल लिंक के निर्माण से उत्तर बिहार के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:

मुख्य लाभ

विवरण

कनेक्टिविटी

सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों का सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ाव।

व्यापार

स्थानीय बाजारों का विस्तार और नेपाल के साथ व्यापार में सुगमता।

कृषि

किसानों के उत्पादों को बड़े शहरों की मंडियों तक पहुँचाना आसान होगा।

रोजगार

निर्माण और परिचालन के दौरान हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार।

रणनीतिक महत्व

भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों और रसद की आवाजाही में तेजी।

स्थानीय लोगों में खुशी की लहर

​डेढ़ दशक के लंबे इंतजार के बाद जब सर्वे की स्पष्ट तारीख सामने आई है, तो सुरसंड, जयनगर और सीतामढ़ी के निवासियों में नई उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परियोजना केवल पटरी बिछाने का काम नहीं है, बल्कि यह इस पिछड़े क्षेत्र की "लाइफलाइन" साबित होगी।


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