काठमांडू : नेपाल में पासपोर्ट की भारी कमी उत्पन्न हो गई है, जिससे विदेश में नौकरी, पढ़ाई और यात्रा की तैयारी कर रहे हजारों नेपाली नागरिक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। देशभर के पासपोर्ट कार्यालयों में भीड़ बढ़ चुकी है और आवेदकों को नए पासपोर्ट के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
सरकार का कहना है कि स्थिति अस्थायी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार समस्या कई कारणों के संयुक्त प्रभाव से पैदा हुई है।
संकट की मुख्य वजहें
1. पासपोर्ट बुकलेट का स्टॉक समाप्त
पासपोर्ट विभाग के पास मौजूदा ई-पासपोर्ट बुकलेट का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। नया स्टॉक विदेशी कंपनी से आना है, लेकिन सप्लाई में देरी के कारण विभाग मांग को पूरा नहीं कर पा रहा है।
2. ठेका और सप्लायर से जुड़े विवाद
नेपाल का पासपोर्ट निर्माण अंतरराष्ट्रीय ठेके पर निर्भर है। पुराने सप्लायर का अनुबंध समाप्त हो चुका है, जबकि नए सप्लायर के साथ हैंडओवर-टेकओवर की प्रक्रिया में तकनीकी बाधाएँ सामने आ रही हैं।
इस बदलाव ने उत्पादन क्षमता को सीधे प्रभावित किया है।
3. सरकारी खरीद प्रक्रिया में जटिलता
पब्लिक प्रोक्योरमेंट नियमों के कारण सरकार सीधे आपात खरीद नहीं कर पा रही। इससे पासपोर्ट बुकलेट के लिए नया टेंडर और आपूर्ति चक्र धीमा हो गया है।
4. विदेश जाने की बढ़ी हुई मांग
पिछले कुछ महीनों में विदेशी रोजगार और पढ़ाई के लिए पासपोर्ट आवेदनों की संख्या में तेज उछाल आया है। विभाग की सीमित क्षमता इतनी बड़ी मांग को संभालने में सक्षम नहीं है।
5. तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियाँ
पासपोर्ट पर्सनलाइज़ेशन सिस्टम, बायोमेट्रिक प्रक्रिया और अन्य तकनीकी ढांचे में भी देरी दर्ज की गई है। कई प्रांतों में मशीनें या तो धीमी हैं, या क्षमता से अधिक दबाव में हैं।
सरकार क्या कह रही है?
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि समस्या पर काम जारी है और नए पासपोर्ट बुकलेट की आपूर्ति जल्द बहाल की जाएगी। मंत्रालय ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि फिलहाल केवल अत्यावश्यक मामलों में ही आवेदन करें — जैसे
मेडिकल इमरजेंसी
विदेश में तत्काल नौकरी का अवसर
छात्रवृत्ति या विश्वविद्यालय की अंतिम तिथि
सरकार का दावा है कि फरवरी-मार्च 2026 तक पासपोर्ट सेवा फिर से सामान्य स्थिति में लौट आएगी।
नागरिकों की चिंता बढ़ी
पासपोर्ट संकट का सबसे बड़ा असर युवा वर्ग पर पड़ रहा है, जो विदेश में नौकरी और शिक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया में जुटे हुए हैं।
कई लोगों को उड़ान टिकट, वीज़ा प्रक्रियाओं और इंटरव्यू डेट्स को लेकर अनिश्चितता झेलनी पड़ रही है। ट्रैवल एजेंट और कंसल्टेंसी सेवाएँ भी आवेदकों की बढ़ती भीड़ को लेकर सतर्क हैं।
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नेपाल अपनी पासपोर्ट निर्माण क्षमता को घरेलू स्तर पर मजबूत करता है और ठेका प्रक्रिया को पारदर्शी बनाता है, तो भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।
फिलहाल सरकार पर दबाव है कि वह आपूर्ति श्रृंखला को जल्द सामान्य करे, ताकि विदेश जाने की तैयारी में लगे लाखों युवाओं के सपने अधर में न लटके।

