बिहार में बंद चीनी मिलों को फिर मिलेगी रफ़्तार: 9 चीनी मिलें फिर से चालू होंगी , 25 नई मिलें लगाने का फैसला

0
नीतीश कुमार की नई सरकार ने बिहार में ठप पड़े चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की पहली बैठक में राज्य के गन्ना उद्योग को फिर से पटरी पर लाने के लिए 9 बंद चीनी मिलों को चालू करने और 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह फैसला गन्ना किसानों, मजदूरों और चीनी उद्योग से जुड़े लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

क्या है कैबिनेट का फैसला?

राज्य में 9 बंद चीनी मिलों को पुनर्जीवित किया जाएगा।

बिहार में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना को मंजूरी दी गई।

बंद मिलों की हालत, निवेश, मशीनरी और भूमि से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए उच्च-स्तरीय समिति बनेगी।

सरकार का दावा—“बिहार का चीनी उद्योग फिर से मजबूत किया जाएगा, किसानों को मिलेगा स्थिर बाजार।”

बिहार में चीनी मिलों की वर्तमान स्थिति

कभी बिहार में 28 चीनी मिलें चालू थीं।

बीते 30–40 वर्षों में आर्थिक नुकसान, मशीनरी के पुराने होने और किसानों को भुगतान में देरी जैसी वजहों से ज्यादातर मिलें बंद हो गईं।

फिलहाल केवल 9–11 मिलें ही सक्रिय हैं।

लगभग 17–18 मिलें बंद पड़ी थीं, जिससे गन्ना किसानों की आय और रोजगार पर सीधा असर पड़ा।

कौन-कौन सी मिलों को मिल सकती है नई जिंदगी?

सरकार की प्राथमिक सूची में जिन बंद मिलों पर कार्य शुरू होने की संभावना है, उनमें शामिल हैं:

चनपटिया चीनी मिल (प. चंपारण): 30 साल से बंद, अब रीस्टार्ट की प्रक्रिया शुरू।

मोतीपुर चीनी मिल (मुजफ्फरपुर)

बगहा, गौतमपुरा, हसनपुर, वारिसनगर सहित अन्य बंद इकाइयाँ (समीक्षा समिति द्वारा अंतिम सूची तय की जाएगी)


इनमें चनपटिया मिल को लेकर विशेष घोषणा हुई है, जिसके पुनरारंभ होने से हजारों किसानों में उत्साह देखा जा रहा है।

किसानों और स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?

गन्ना किसानों को मिलेगा स्थिर बाजार

बंद मिलों के खुलने से बढ़ेगी पेराई क्षमता

नई मिलों और रीस्टार्ट मिलों से हजारों रोजगार उत्पन्न होंगे

ट्रांसपोर्ट, सप्लाई, मजदूरी और स्थानीय व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फिर आएगी सक्रियता और आय में वृद्धि

सरकार के सामने चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालाँकि, बंद मिलों को चालू करना आसान नहीं होगा।
सरकार के सामने कई चुनौतियाँ होंगी:

बंद मिलों की मशीनरी पूरी तरह जर्जर

जमीन विवाद और पुराने ऋण

उचित निवेशकों की कमी

गन्ना किसानों की घटती दिलचस्पी

मिलों के स्थायी संचालन के लिए स्थिर सप्लाई और बाज़ार सुनिश्चित करना


गन्ना उद्योग विभाग ने साफ कहा है कि “पुनर्जीवन एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन इसे मिशन मोड में पूरा किया जाएगा।”

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
एक टिप्पणी भेजें (0)
To Top