हमर पहिला प्यार (भेलेंटाइन इस्पेसल)🌹
नया-नया जवान हो रहे थे हम.. हमारा फेवरेट हीरो मित्थुन चकरवर्ती से सारुक्ख खान हो गया था. राहुल राय का आशिकी इतना बार देख डाले, जितना बार ऊ खुद्दो नहीं देखा होगा.. कुमार शानू हमारा देवता हो गया था.. उसी टेम्पू में बैठना शुरू कर दिए थे जिसमें "जीता था जिसके लिए" बजता था.. कापी के पहिला पन्ना पर "जय माँ सरस्वती" के बदले अब "प्यार ही पूजा है" लिखने लग गए थे! ई सोलह बरस की बाली उमर को हमारा पहिला सलाम था.
अब हम जवान हो रहे थे.. इसमें नया कोनो बात नहीं है! सब एक-ना-एक दिन जवान होता है लेकिन इस बार चूंकि हम जवान हो रहे थे, इसलिए मौका स्पेशल था.. अब हमको शिशु मंदिर के विद्यार्थी पर हँसी आता था, वहां भईया/बहन चलता था..! हम सरकारी इस्कूल का खिचड़ी-चोखा खा लेंगे लेकिन ससुर ऊँहा एडमिशन नहीं लेंगे.. बताइए ई कोनो बात हुआ भला.! उनका छोड़िए, हमरा सुनिए..!! हमको अब प्यार होने लगा था, सच्चा वाला..! माँ कसम बता रहे हैं, एकदम सच्चा वाला..! कभी मन करता था रात के तीन बजे जाके उसके घर के सामने आई लव यू चिल्ला आएं या खून से लवलैटर लिख के मोहतरमा की खिदमत में पेश कर आएं! अब हम कोई अमिता बचन तो थे नहीं कि हम चिल्ला आएँगे और मोहल्ला वाला हमको कूटने से छोड़ देगा.. आ भईया, देह में खुद्दे साला पाव भर खून था, उसमें कितना का लैटर लिखें आ कितना से अपना शरीर का सिस्टम चलाएं!
फैसला हुआ कि लव लैटर लिक्खा तो जाएगा, लेकिन खून से नहीं जैटर के पेन से! लंगोटिया यार सब में चंदा लगाके जैटर का पेन आया आ पांच रुपया में प्यार-भरी शायरी का किताब, जिसके सबसे लास्ट वाले पियरका पन्ना पर डाक्टर हासमी का हॉस्पिटल चलता था.. रात भर डिबिया के रोशनी में बैठ के खूब आँख फोड़े ता चार ठो शायरी का सलेक्शन हुआ! लैटर में क्या-क्या लिखा जाएगा, इसके लिए कई बार पैनल डिस्कशन बैठा! अंत में न्यायमूर्ति ने फैसला सुनाया कि जो रोमियो है वही अपने अच्छर में लैटर लिखेगा.. हमरा अच्छर तो जैसे उड़ता हुआ मच्छर! हम बोले - काहे हमरा घर बसने से पहिले ही आग लगा रहे हो, भलमानुषों!
अंत में एगो दोस्त तैयार हुआ, क्लास का मस्त होनहार लड़का.. नीमन हैण्डराइटिंग वाला.. ऊ भी इस शर्त पर कि जब अगली बार भीसीआर चलेगा तो उसके लिए स्पेशल "माँ तुझे सलाम" चलाया जाएगा! पर ई तो भकचोन्हर निकला.. खाली रटने में ही तेज़ है बोतल.. अबे लव-लैटर में "With most humbly and respectfully I beg to say you" कौन लिखता है बे..! भक्क साला चतुर रामलिंगम! हम अपने लिखेंगे लैटर.. हैण्डराइटिंग ख़राब है तो का हुआ, बतकुच्चन तो आता है.. बात बनाबे में ता बचपने से पंडित हैं.. लो बेट्टा हमरा लैटर भी तैयार हो गया! कसम मजनू के मुहब्बत की, का तगड़ा लैटर लिखाया! मतलब एक बार कटरीना भी पढ़ ले तो अपना फिलिम का शूटिंग छोड़ के सम्पर्क क्रांति पकड़ के बिहार आ जाए!
लैटर भेजने के लिए अब मेघदूतम की सर्चिंग शुरू हुआ.. ई काम सबसे रिस्की होता है. इसी में पकड़ाने का सबसे बड़ा झंझट होता है.. अंत में एक सहेली को तमाम साम-दाम-दंड-भेद से राजी किया गया, ऊ लैटर लेके चल दी हमरी मुहब्बत के पास.. साला, ऊ लैटर ही का जो धराए ना! हाय रे हमरा फूटल किस्मत! हेडमास्टर साहेब खुद्दे धर लिए थे.. पूरा जबार में मास्टर साहेब लव-लैटर की हैण्डराइटिंग पकड़ने के मामले में फोरेंसिक एक्सपर्ट थे!! अब हमरा का होगा रे ससुरा..? स्कूल ता छूटबे करेगा आ पिताश्री अलगे कूटेंगे! खैर हैण्डराइटिंग मिलाया गया और हम रो-धो के बच निकले.. सोनू निगम से शुरू हुआ प्यार अगम कुमार निगम में पहुंच गया..
अपनी इस असफलता का मलाल मास्टर साहेब को आज भी है.. खैर हमरा प्यार अधूरा ही रह गया.. ये तो हम अभी शुरुए हुए थे.. अभी मोबाइल, एयरटेल, फेसबुक, व्हाट्सएप सबका आना तो बाकिए है.. कल ही गाँव से दोस्तवा का फोन आया है "अबे मामा बन गये हो बे, तुम्हारी वाली के बेटवा का छठीहार है आज!! और हम चैटिंग में बिजी थे फेसबुक पर किसी एंजेल प्रिया से.......
- Aman Aakash..✍🏻





